कियोस्क संचालकों की मनमानी चरम सीमा पर क्या लगेगा अंकुश


शहडोल(सीतेंद्र पयासी)। भारत सरकार के द्वारा बैकिंग की सुविधा को आसान बनाने के साथ साथ दूर दराज के ग्रामीण जनों को सीधे बैंको से जोड़ने के उद्देश्य से बैंको के उपक्रम के रूप मे कियोंस्क बैंको की स्थापना की गयी थी जिससे शहरी क्षेत्रो से दूर रहने वाले ग्रामीण जनों को बिना किसी परेशानी के उनके मेहनत की मजदूरी व शासन के द्वारा चलाई जा रही अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियो के खाते मे पहुँचे और हितग्राही बिना किसी परेशानी के अपने मेहनत की राशि का आहरण कर सके लेकिन इन कियोंस्क संचालको की मनमानी का आलम यह है की ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवंटित हुए ये किओस्क ग्रामीण क्षेत्रों मे संचालित न हो करके संचालको के द्वारा अपने सुविधा अनुसार जगहों मे संचालित किया जा रहा है जिससे दूर दराज के ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है 

                        *क्या है मामला*

प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार के द्वारा बैंकिंग सुविधा के विस्तार के लिए बैंको के छोटे उपक्रम के रूप सभी बैंको के कियोंस्क की शुरुआत करके ग्रामीण क्षेत्रों मे बैंको के उपयोग के लिए शुरू किया गया था जिससे शहरी क्षेत्रों से दूर ग्रामीण क्षेत्रों मे निवास करने वाले ग्रामीणों को बैंको मे होने वाली परेशानी से बचाया जा सके लेकिन कियोंस्क संचालको के द्वारा ग्रामीणों की परेशानी को नजरअंदाज करते हुए अपनी सुविधा के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवंटित कियोस्क बैंको को अपनी सुविधा अनुसार मनचाहे जगहों पर संचालित किया जा रहा है प्राप्त जानकारी के अनुसार शहडोल जिले के विकासखण्ड जयसिंहनगर मे आधे से ज्यादा कियोंस्क बैंक जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवंटित है वो सभी अपने मनमानी के चलते सब शहरी क्षेत्रों मे धड़ल्ले से संचालित हो रहे है जिसका खामियाजा इन ग्रामीणों को भोगना पड़ता है जब भी इनको किसी भी प्रकार से अपने खाते से राशि का आहरण करना होता है तो इनको लगभग 10-20 किलोमीटर की दूरी बड़े कठिनाई से तय करके बैंक तक पहुँच पाते है तब जा के कही इनके मेहनत की कमाई की राशि प्राप्त हो पाती है जिसके लिए इनको काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है 

                  *क्या होता है इनका खेल*

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवंटित कियोंस्क बैंक शहरी क्षेत्रों मे तो संचालित तो होते ही है इसके साथ ही जब हितग्राहियो के बैंक खातों मे किसी भी प्रकार से शासकीय राशि आती है तो इन कियोस्क बैंक के संचालको के द्वारा इन भोले भले ग्रामीणों को अंधेरे मे रख कर के उनकी राशि का आहरण कर लिया जाता है जिसकी जानकारी हितग्राहियो को नहीं रहती है और जब किसी भी प्रकार से हितग्राहियो को जानकारी होती है तो कियोंस्क संचालको के द्वारा इन हितग्राहियो के साथ समझौता करके इनकी राशि लौटा दी जाती और पूरी बात को दवा दिया जाता है.

                   *इनका क्या कहना है*

इस विषय के सम्बन्ध मे जब उच्च अधिकारियों से फ़ोन के माध्यम से सम्पर्क किया गया तो उनका कहना था कि हमारे संज्ञान मे अभी तक ऐसा कोई भी विषय नहीं आया है यदि कोई ऐसा मामला सामने आता है हम उसकी जांच करवा लेगे और जांच मे जो भी बात सामने आएगी उस हिसाब से कार्यवाही करेंगे।

                         *अमित भगत*

                           *आर.एम*

                    *स्टेट बैंक ऑफ इंडिया*

इस विषय के सम्बन्ध मे जब स्टेट बैंक जयसिंहनगर के ब्रांच मैंनेजर से फ़ोन के माध्यम से संपर्क किया गया तो उनका कहना था अभी तक हमारे सज्ञान मे एक विषय सेमरा का आया है जिस पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है आगे भी यदि ऐसे विषय आते है तो उन पर भी जरूर कार्यवाही कि जाएगी

                          *नीरज कूजूर*

                           *ब्रांच मैंनेजर*

                    *स्टेट बैंक जयसिंहनगर*

Post a Comment

أحدث أقدم