विकास या विनाश निजी जमीनों को छलनी कर रहे बीएसएनएल के ठेकेदार।
बिना अनुमति के चली जेसीबी
नियमों के मुताबिक, किसी भी निर्माण कार्य या खुदाई के लिए संबंधित ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है। लेकिन यहाँ बीएसएनएल के ठेकेदारों और कर्मचारियों ने मनमानी की सारी हदें पार कर दीं। सरपंच और सचिव का आरोप है कि विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित अनुमति के सड़क के बीचों-बीच गहरी खुदाई शुरू कर दी, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।
सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार के नाम पर सरकारी विभागों की तानाशाही अब आम नागरिकों के निजी हक पर डाका डालने लगी है। जनपद पंचायत गोहपारू क्षेत्र के अंतर्गत बीएसएनएल द्वारा केबल बिछाने के कार्य में नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है। ग्राम पंचायत की ग्रेवल रोड को नष्ट करने के बाद, अब विभाग के ठेकेदारों ने बिना किसी अनुमति के किसानों की निजी कृषि भूमि (प्राइवेट जमीन) को खोदना शुरू कर दिया है।
किसानों की मेहनत पर फिर रहा पानी
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी भूमि को बड़ी मेहनत से खेती के लिए तैयार करते हैं। लेकिन बीएसएनएल के कार्य में लगी जेसीबी मशीनों ने खेतों के बीचों-बीच गहरी खुदाई कर दी है।
प्रभावित किसानों का कहना है कि न तो उन्हें कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही उनकी सहमति ली गई। केबल बिछाने के बाद मिट्टी को भी सही तरीके से समतल नहीं किया जा रहा है, जिससे खेतों की उपजाऊ शक्ति और मेढ़ें पूरी तरह खराब हो गई हैं।
कानून की सरेआम धज्जियां
नियमों के अनुसार, किसी भी निजी भूमि पर कार्य करने से पहले भू-स्वामी की लिखित अनुमति और उचित मुआवजे का प्रावधान होता है। लेकिन यहाँ विभाग और ठेकेदार की जुगलबंदी ने सीधे तौर पर किसानों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है।
बिना अनुमति किसी की निजी जमीन खोदना 'अतिचार' (Trespassing) की श्रेणी में आता है, जिसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा सकती है।
लाखों की लागत से बनी सड़क हुई खंडहर
ग्रामीणों ने बताया कि बड़ी मुश्किल से पंचायत ने इस ग्रेवल रोड का निर्माण कराया था ताकि कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से मुक्ति मिल सके। लेकिन अब बीएसएनएल की इस कार्यप्रणाली ने लाखों रुपये की लागत से बनी इस सड़क को खंडहर में तब्दील कर दिया है। खुदाई के बाद गड्डों को ठीक से भरा भी नहीं जा रहा है, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
जनता की मांगः कार्यवाही हो और मुआवजा मिले
पीड़ित किसानों ने इस तानाशाहीपूर्ण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं बदली और हुए नुकसान की भरपाई नहीं की, तो वे काम को बंद करवाकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
"हमें इस खुदाई की कोई जानकारी नहीं दी गई। बिना अनुमति सड़क खोदना शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसा है। हम इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों और जनपद सीईओ से लेकर कलेक्टर तक करेंगे।" (सरपंच ग्राम पंचायत कर्री

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