गांधी छाप के सहारे भ्रष्टाचारी है भारी ,लोकायुक्त रीवा की जांच भी है संदेह के घेरे में

जनजातीय कार्य विभाग को गुमराह कर कराया स्थानांतरण अब पुनः प्रभारी प्राचार्य बनने की फ़िराक़ में है, राजकुमार साकेत


संपादक शहडोल। एक ऐसा ही मामला विकास खंड जयसिंहनगर के शास. उच्च. माध्य. वि. चितराव का है जहां पर वर्ष 2020 में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य रहे राजकुमार साकेत को लोकायुक्त  रीवा की टीम ने गायत्री वैश्य भृत्य की शिकायत पर. लंबित वेतन भुगतान  नहीं करने एवं रिश्वत  की मांग करने  पर दिनाँक 20/2/2020 को राशि 10,000 नगद  लेते  रंगेहाथों. ट्रैप किया गया था ,तत्पश्चात लोकायुक्त कार्यालय रीवा ने राजकुमार साकेत के विरुद्ध अपराध क्रमांक 46/2020 धारा (7) भ्र.   अधि.1988 संशोधन अधि नियम 2018 के तहत मामला पंजीबद्ध किया था, लेकिन इसके बाद लोकायुक्त  रीवा को क्या हो गया कि 6 वर्ष  बीत जाने  के बाद भी  न तो साकेत को गिरफ्तार किया गया  और न  ही विभाग ने  निलंबित किया,  जो लोकायुक्त की कार्यवाही पर प्रश्न चिन्ह लगाता है,कि आखिर क्या कारण जो राजकुमार साकेत आज भी खुले आम गांधी छाप के दम  निरंतर कार्य कर रहे हैं आखिर कार्यवाही कब  होगी, यह आम जन मानस में चर्चा का विषय बना हुआ है।

वर्ष 2025 में लोकायुक्त प्रकरण प्रचलन में होने के बाद भी जनजातीय विभाग को गुमराह कर करा लिया स्थानांतरण , विभाग ने भी  नहीं  लिया  संज्ञान,  आम  जन मानस में स्थानांतरण निरस्त करने की हो रही है मांग।     

वर्ष 2025 में शासन द्वारा घोषित स्थानांतरण नीति का गलत तरीके से लाभ लेते हुए विभाग से लोकायुक्त में  प्रचलित जानकारी छुपाकर गांधी छाप के दम स्थानांतरण कराकर चितराव हायर सेकंडरी से आदर्श आवा .हायर सेकंडरी जयसिंहनगर करा लिया और विभाग ने भी नियम विरुद्ध करा दिया उपस्थित, आखिर इसका जिम्मेदार कौन है।    

                 


अब राजकुमार पुन: बनना चाहता है प्रभारी प्राचार्य              

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी हाल ही में राजकुमार साकेत प्रभारी प्राचार्य बनने हेतु जुगाड़ लगाकर जनजातीय विभाग के आला अधिकारियों को इस आशय का पत्र लिखवा कर संबंधित कार्यालय तक पहुचा दिया है। सबसे बड़ा देश का यही दुर्भाग्य है कि आखिर कब तक ऐसे भ्रस्टाचार  करने वालों को गाँधी छाप के दम पर लोकायुक्त, संबंधित विभाग एवं जनप्रतिनिधि उपकृत करते रहेगे  क्षेत्र की जनता जानना चाहती हैं, फिर किस बात के लिए लोकायुक्त की स्थापना की गई है, जब आम जनता को न्याय नहीं मिल रहा है ।


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