यातायात विभाग द्वारा नियमों का किस तरह से कराया जा रहा पालन

शहडोल यातायात के रहते सवारियों से किराया से ज्यादा राशि की वसूली


भोपाल/शहडोल(सीतेंद्र पयासी)। शहडोल जिले के यातायात की व्यवस्था इस समय किस तरह से मजबूत है या केवल दिखावा है जबकि वास्तव में यातायात के नियमों का पालन करवाने में शहडोल जिला कितना सक्षम है, यह किसी से छिपा नहीं है। कहने के लिए तो चालानी कार्यवाही की जाती है। उसके बाद भी यातायात को सुधारने में सक्षम नहीं है तभी तो ओवरलोड गाड़ियां खुलेआम नियमों को दरकिनार करते नजर आ ही जाते हैं। यह एक बार नहीं बल्कि अक्सर देखा जाता है, कि चलानी कार्यवाही खासकर उस समय की जाती है जब इन्हें टारगेट दिया जाता है। जिसकी गाज ज्यादातर दो पहिया वाहनों पर ही गिरती है। ओवरलोड छोटे एवं बड़े वाहनों पर जो दुर्घटना को आगाज देने में अपनी प्राथमिकता देते हैं, उन पर आवश्यक रूप से कार्यवाही करनी चाहिए किंतु चालानी कार्यवाही का आडंबर कर उसे छोड़ दिया जाता है। यह हाल यातायात का ही नहीं अपितु स्थानीय क्षेत्रो के थानों का भी देखा जाता है आखिर यह व्यवस्था कब सुधरेगी।

दिये हुए कंपनी से ज्यादा लाइटिंग का होना


जहां एक ओर यातायात का नियम यह कहता है, कि कंपनी द्वारा वाहनों में दिए गए लाइटिंग का प्रयोग किया जाना चाहिए। किंतु उसके बाद भी वाहनों में कंपनी के दिए हुए लाइटिंग से अधिक लाइट लगाकर वाहनों को रास्ते पर दौड़ाया जाता है। जिससे रात्रि के दौरान नियमों से चलने वाले वाहन चालकों पर भारी पड़ता है जिससे रास्ते पर वाहन चलाने पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। खासकर बड़े वाहन ट्रक एवं बस रात्रि के दौरान इसका उपयोग ज्यादातर करते हैं। जबकि मोटर वाहन अधिनियम 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 CMVR के अंतर्गत सुरक्षित ड्राइविंग के लिए सही प्रकार की लाइटों का उपयोग किया जाना चाहिए लेकिन उसके बाद भी नीली या अन्य चमकीली एलईडी लाइट जो दूसरों को परेशान करती है का वाहनों में प्रयोग किया जाता है उनके विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए।


लिमिट स्पीड से ज्यादा रफ्तार

सड़क सुरक्षा के नियम मुख्य रूप से वाहन अधिनियम के तहत आते हैं। सुरक्षित ड्राइविंग के लिए गति सीमा का पालन करना अनिवार्य होना चाहिए,पर शहडोल यातायात विभाग द्वारा इन नियमों का पालन किस प्रकार कराया जाता है यह आसानी से देखा जाता है जिसमें एक्सप्रेस वे आमतौर पर 100 से 120 किमी घंटा, राष्ट्रीय राजमार्ग पर हल्के मोटर वाहन के लिए 80 से 100 किमी प्रति घंटा, शहर या शहरी सड़कों पर मध्यम यातायात 20 से 40 किमी घंटा, मुख्य सड़कों पर 40 से 60 किलोमीटर घंटा, आवासीय क्षेत्र, विद्यालय, अस्पताल के पास गुजरते समय वाहनों की स्पीड 0 से 20 किमी अत्यधिक सावधानी के साथ वहां चलना चाहिए, किंतु शहडोल जिले में इसका पूर्ण रूपेण पालन किस प्रकार से होता है। यह यातायात शहडोल बता सकती है।

तय किराए सें ज्यादा वसूली

भारत सरकार द्वारा जहां यातायात नियम के तहत बसो के लिए निर्धारित किराया तय किया गया है, पर शहडोल जिले में रात्रि के दौरान चलने वाली बसें आमजन को जो 45 किलोमीटर दूर के होतें है। उन्हें बस में बिठाना उचित नही समझतें जबकिं सड़क पर बस चलानें की अनुमति इसलिए होती है, कि आमजनमान कों परेशानिया ना हों किन्तु इनकें द्वारा यह कहकर सवारियों कों बस में बिठानें सें मना किया जाता हैं, कि बस आनलाईन हैं अगर बस आनलाईन हैं तों सड़क और यातायात शहडोल कि आवश्यकता क्या है। कहानी यहीं खतम नही होती बल्कि जब रात्रि के दौरान सवारी बस में बैठता हैं तों उससें 45 किमी का किराया 100 रुपए लिया जाता हैं वों भी शहडोल वाई पास तक के लिए। जों यातायात शहडोल कें लिए बड़े शर्म की बात हैं।

फिटनेस कें आधार पर कितनें वाहन 

शासन द्वारा जहाँ वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है, जों यह सुनिश्चित करता है, कि वाहन सड़क पर चलनें कें लिए सुरक्षित है पर क्या यातायात शहडोल द्वारा इस विषय पर कभीं सोचा गया। क्योंकि सूत्रों किं मानें तों शहडोल जिलें में जितनें भीं वाहन है उनमें सें कुछ जों दिन व रात्रि कें दौरान सड़कों पर दौड़ रहें हैं। वह बिना फिटनेस और अनुमति कें हैं जबकिं शासन नें इस नियम कें तहत फार्म जिसमें 38 एवं 20 शामिल है 10 वर्ष सें पुरानें वाहनों कें फिटनेस टेस्ट का प्रावधान रखा गया पर क्या इनका पालन होता हैं।

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