जानकारी के अनुसार उक्त निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति 7 मई को प्राप्त हुई, जबकि ग्राम पंचायत द्वारा 9 मई को प्रशासकीय स्वीकृति ली गई। हैरानी की बात यह है कि सरपंच-सचिव द्वारा 10 मई को “वाला जी ट्रेडर्स” का जो बिल लगाया गया, उसमें सामग्री सप्लाई की तारीख 4 एवं 5 मई दर्ज बताई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब कार्य की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति ही नहीं मिली थी, तब सामग्री खरीदी और बिल जारी कैसे हो गया? स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर निर्माण कार्य शुरू हुए बिना ही भुगतान निकालने की तैयारी कर ली गई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा मामला शासकीय राशि के दुरुपयोग और फर्जी बिलिंग से जुड़ा हो सकता है। लोगों ने कलेक्टर एवं जनपद पंचायत से मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो लाखों रुपए की राशि बिना कार्य के ही निकाल ली जाती। अब यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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