आवेदन के एक माह बाद भी नहीं हो रहा असर
उच्चाधिकारी बने मूक दर्शक
जनपद पंचायत जयसिंहनगर से लेकर जिला पंचायत शहडोल तक के अधिकारी सिर्फ मूक दर्शक बनकर बैठे हुए हैं आखिर हिमेंद्र पटेल और मनोज का ऐसा कौन सा जादू है जो अधिकारियों को मुक्त दर्शक बने पर मजबूर कर रहा है यही नहीं बल्कि इनकी इतनी बड़ी पकड़ कहां से है जो उनके सामने अधिकारी नतमस्तक दिखाई दे रहे हैं जिला पंचायत अधिकारी जिनके बारे में यह सुना गया है कि इनके द्वारा अपने कार्य के प्रति ईमानदारी बखूबी से निभाया जाता है पर क्या जनपद पंचायत जयसिंहनगर के क्षेत्र में इस गुणगान का असर है नहीं तभी तो उनके अंतर्गत ग्राम पंचायतो में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और आवेदन करने के बाद भी आवेदक सिर्फ घूमता हुआ दिखाई दे रहा है क्योंकि अधिकारियों को भी पता है की जांच होने पर पोल उन्हीं की खुलने वाली है तभी तो आवेदन का असर नहीं हो पा रहा।
कौन देगा जानकारी
जब भी हिमेंद्र और मनोज के क्षेत्र से संबंधित जानकारी मांगी जाती है तो यह नहीं समझ में आता की क्षेत्र में कार्य तो इनके द्वारा कराया जाता है पर कागज कहीं नहीं मिल पाता उपयंत्रियो द्वारा यह कहा जाता है कि कागज ग्राम पंचायत में है तो वही ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा यह कहा जाता है कि संबंधित कागज कार्यालय में उपलब्ध नहीं है तो कार्य करवाने के बाद कागज जाता कहां है जहां इन उपयंत्रियों को कार्य करवाने के बाद कागज की एक प्रति अपने पास रखनी चाहिए पर उनके द्वारा उसे ग्राम पंचायत पर थोपने का काम किया जाता है यह कहां तक न्याय उचित है और इनके उच्चाधिकारी द्वारा इन्हें किस तरह की समझाइए दी जा रही है यहां तो वही कहावत चरितार्थ होते नजर आ रही है चोर-चोर मौसेरे भाई क्योंकि अगर यह नहीं होता तो आवेदन करने के एक माह बाद भी आवेदन ठंडे बस्ती में नहीं पड़ा होता।

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